ब्लैकबेरी ऑटो कैनबिस स्ट्रेन वीक-बाय-वीक गाइड
- 1. ग्रो स्पेसिफिकेशन
- 2. ग्रो सेटअप
- 3. अंकुरण और सीडलिंग स्टेज | सप्ताह 1
- 4. अर्ली वेज | सप्ताह 2
- 5. मिड वेज | सप्ताह 3-4
- 6. ट्रांजिशन (प्री-फ्लावर) | सप्ताह 5
- 7. शुरुआती फ्लावर | सप्ताह 6-7
- 8. मिड फ्लावर (बल्क फेज) | सप्ताह 8-9
- 9. पकना और कटाई | सप्ताह 10 (और आगे)
- 10. परिणाम
- 10. a. Blackberry auto यील्ड
- 10. b. Blackberry auto स्मोक रिपोर्ट
- 11. निष्कर्ष
Blackberry Auto एक ऐसा स्ट्रेन है जो बीज से ले कर स्मोक तक एक बेहतरीन अनुभव देता है। ग्रोअर्स के लिए, यह स्ट्रेन मजबूत और तेज़ विकास के साथ किसी सपने के सच होने जैसा है। यह अपने पूरे जीवनचक्र में आसानी से पनपता है, मजबूती दिखाता है और अंत में शानदार यील्ड देता है। इसकी आकर्षक रंगत और बेहतरीन बेरी जैसी खुशबू, Blackberry को इंद्रियों के लिए लुभावना बनाती है और यह हमेशा स्वाद में प्रभावित करता है, साथ ही इसकी प्रभावशाली शक्ति भी अद्भुत है।
Blackberry Auto के साथ बेहतरीन गुणवत्ता हासिल करना ज्यादा अनुभव की मांग नहीं करता। फिर भी, हमें उम्मीद है कि हमारा सप्ताह-दर-सप्ताह ग्रोइंग गाइड आपको आपके उच्चतम स्तर पर पहुँचाएगा। बीज से हार्वेस्ट तक इसकी टाइमलाइन और प्रगति पर उपयोगी जानकारी के साथ, आप इस वीड को किसी अनुभवी प्रो की तरह उगा पाएंगे।
1. ग्रो स्पेसिफिकेशन
इस शानदार Blackberry स्ट्रेन के लिए तैयार हो जाइए, जो ऑटोफ्लावरिंग कैनबिस की दुनिया में एक असली रत्न है। Sativa 25% / Indica 75% की बेहतरीन बनावट के साथ, यह पौधा उत्साहित करने वाले और शांतिकारक प्रभावों का संबंलित संतुलन देता है। Blackberry को उगाना एक लाभकारी अनुभव है, इसकी प्रभावी साइज और 70 से 120 सेमी की ऊँचाई के साथ इसकी XL पहचान दिखती है। अंदर, आप 450-600 g/m2 की भरपूर उपज की उम्मीद कर सकते हैं, जबकि बाहर उगाने पर हर पौधे से 50 से 250 ग्राम का इनाम मिलेगा।

Blackberry का THC लेवल प्रभावशाली 23% तक पहुँचता है, जो तेज और जोरदार अनुभव की गारंटी देता है। Blackberry का स्वाद एक फ्लेवर सिम्फनी है, जिसमें रसीले बेरीज़, लुभावनी मिठास और Earthy अंडरटोन्स खूबसूरती से मिलते हैं। हर सांस अंदर-बहार करने पर आप इसके स्वादिष्ट मिश्रण से मंत्रमुग्ध रह जाएंगे।
2. ग्रो सेटअप
Blackberry Auto, Fast Buds का बेहतरीन स्ट्रेन, लंबे समय से दुनिया भर के ग्रोअर्स की पसंद रहा है। अच्छी खबर ये है कि अगर आप खुद इस ऑटोफ्लावरिंग रत्न को उगाने के इच्छुक हैं, तो आपको ऑनलाइन ढेर सारी उपयोगी जानकारी मिल जाएगी। इस व्यापक गाइड में, हमने सोच-समझकर चार ग्रो डायरीज़ चुनी हैं। हमारा फोकस उन डायरीज़ पर रहा, जिसमें ग्रोअर्स ने बेहतरीन खेती तकनीकें अपनाईं, जिससे आप आत्मविश्वास से उनके कदमों पर चल सकें और शानदार परिणाम प्राप्त कर सकें।
| ग्रो स्पेस | लाइट | मीडियम | |
|---|---|---|---|
| A | 0.8 m2 | 360W LED | मिट्टी |
| B | 0.72 m2 | 630W LED | मिट्टी/पर्लाइट |
| C | 1.52 m2 | 150W LED | DWC |
| D | 1.22 m2 | 150W LED | कोको |
साथ ही, हमने Blackberry Auto को अलग-अलग परिस्थितियों और सेटअप में पेश करने की पूरी कोशिश की है ताकि आपको अलग-अलग दृष्टिकोण मिल सकें। हमारा उद्देश्य आपको इस ऑटोफ्लावर को आपके खुद के ग्रोइंग स्टाइल के अनुसार ढालने में मदद करना है। लेकिन निश्चिंत रहें कि Blackberry Auto ने हर ग्रोइंग कंडीशन में अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई है और शानदार परिणाम दिए हैं। चाहे आप अनुभवी ग्रोअर हों या बिलकुल नए, यह स्ट्रेन आपको एक पुरस्कृत और संतोषजनक खेती यात्रा का वादा करता है।
3. अंकुरण और सीडलिंग स्टेज | सप्ताह 1
अपने इंडोर ग्रो स्पेस में बिल्कुल सही माहौल बनाना सफल कैनबिस खेती के लिए बहुत जरूरी है, खासकर उन शुरुआती हफ्तों में जब आपके नन्हे सीडलिंग अभी भी नाजुक होते हैं। तापमान पर ध्यान देना चाहिए, इसे थोड़ा गर्म रखें, और हवा में उपयुक्त नमी होनी चाहिए ताकि आपके छोटे ‘ग्रीन बेबीज़’ को शुरूआत में ही अच्छी ग्रोथ मिल सके।

अब, सभी नए माली भाइयों-बहनों के लिए, हम समझते हैं कि कैनबिस बीजों का अंकुरण थोड़ा डरावना लग सकता है। आप इन महंगे बीजों को बर्बाद नहीं करना चाहेंगे, है ना? घबराएं नहीं। Fast Buds समेत विश्वसनीय ब्रीडर से अच्छे क्वालिटी के बीज काफी मजबूत होते हैं, और इन्हें जीवन में लाना कोई रॉकेट साइंस नहीं।

आपको बस तीन चीज़ें चाहिए: एक गर्म माहौल (बसंत ऋतु जेसा), थोड़ी नमी, और थोड़ी अंधकार। इन परिस्थितियों में आपके बीज जल्दी अंकुरित होंगे, आमतौर पर 1–3 दिन में। कई तरीके हैं, लेकिन सबसे आसान है– बीजों को गीले पेपर टॉवल्स के बीच रखना, फिर प्लेट्स के बीच सैंडविच कर उसे गर्म और अंधेरे स्थान पर रख देना।

कुछ ग्रोअर्स अपने बीजों को थोड़ी देर के लिए पानी में डाल देते हैं। यहाँ तक कि कुछ बीजों को सतह पर तैरने देते हैं जब तक उनकी टैपरूट बाहर नहीं आ जाती। यह भी एक वैध तरीका है, लेकिन कौन सा भी तरीका चुनें, याद रखें, गर्मी, नमी और अंधकार का कॉम्बिनेशन जरूरी है।

एक बार बीज फट जाए और टैपरूट लगभग आधा इंच (1 सेंटीमीटर से ज्यादा) हो जाए तो समय है इसे चुने हुए मीडियम में लगाने का। ऑटोफ्लावर उगाते समय हम सलाह देंगे कि शुरुआत से ही अंतिम (और बड़ा) गमला इस्तेमाल करें। यह ट्रांसप्लांट के खतरे से बचाता है। लेकिन अगर आप आत्मविश्वासी हैं, तो आप छोटे कंटेनर (जैसे सोलो कप्स) भी ले सकते हैं। उनकी भी अपनी सहूलियतें हैं-जैसे हैंडलिंग और पानी देना आसान।

एक और टिप: पहले दिन से ही अपने छोटे सीडलिंग पर फ़र्टिलाइज़र की बौछार करने की इच्छा को रोकें। ये नन्हे और नाजुक होते हैं, और अधिक पोषक देना नुकसान ज्यादा पहुंचा सकता है। धैर्य रखें और पौधे के थोड़ा बड़ा होने तक Nutrients ना दें। थोड़ा बड़ा होने के बाद पौधा खुद दिखा देगा कि अब उसे थोड़ा एक्स्ट्रा चाहिए।
4. अर्ली वेज | सप्ताह 2
दूसरे सप्ताह के दौरान अपने सीडलिंग के लिए सही माहौल बनाना महत्वपूर्ण है। तापमान और नमी पर ध्यान दें, इन्हें उपयुक्त रेंज में रखें। साथ ही अपने लाइट सोर्स और पौधे के बीच की दूरी का ध्यान रखें, न बहुत पास ताकि लीफ बर्न न हो जाए, न बहुत दूर जिससे स्ट्रेचिंग हो।

जैसे ही आपका सीडलिंग इस स्टेज में पहुंचता है, अब देखिए कुछ दिलचस्प बदलाव। पत्तियाँ बड़ी हो रही हैं, जो ग्रोथ का स्पष्ट संकेत है। और मज़ेदार बात: अब आपको छोटे साइड ब्रांचेज़ दिखने लग सकते हैं, खासतौर पर अगर आप कोई ज्यादा झाड़ीदार किस्म उगा रहे हैं। पौधा खुद को एक शानदार पत्तों वाला मास्टरपीस बनाने के लिए तैयार कर रहा है।

अब बात करते हैं ट्रेनिंग की। यही समय है जब आप पौधे की ग्रोथ को गाइड कर सकते हैं और इसे और ज्यादा झाड़ीदार बनने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। कुछ ग्रोअर्स LST ट्रेनिंग इसी स्टेज में शुरू करते हैं, लेकिन ऑटोफ्लावर्स के लिए कम स्ट्रेस वाले तरीकों को चुनना उचित है। माइल्ड बेंडिंग और मुख्य तने को धीरे से बांधना सेफ है। हाई-स्ट्रेस मेथड (जैसे टॉपिंग/फिमिंग) अनुभवी ग्रोअर्स के लिए छोड़ दें।

पानी देने के मामले में सटीकता जरूरी है। सही मात्रा और सही अंतराल पर पानी दें ताकि वाटर स्ट्रेस न हो। ओवरवाटरिंग जड़ों को घुटन देती है, जबकि अंडरवाटरिंग से ग्रोथ रुक सकती है। सही बैलेंस रखें, और हर बार पानी देने के बीच में मिट्टी को हल्का सूखने दें जिससे जड़ें स्वस्थ बनें।

अब बात करते हैं पोषक तत्वों की। यदि आप मिट्टी में उगा रहे हैं, तो सप्ताह 2 से पौधों को अतिरिक्त न्यूट्रिएंट्स लाभ पहुंचा सकते हैं। मीडियम के पोषक तत्व धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं, और पौधे को छोटा-बूस्ट चाहिए। हाइड्रोपोनिक सिस्टम्स या कोको कॉयर में उगा रहे हैं तो पैदाइश के पहले दिन से ही पोषक तत्व जरूरी हैं।

जो लोग कैनबिस खेती में नए हैं, ऑर्गेनिक तरीकों का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित है। ऑर्गेनिक प्रैक्टिस में प्राकृतिक खाद और सूक्षमजीवों को मीडियम में मिलाने से वातावरण स्वस्थ बनता है। सूक्षमजीव डालें, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण और संपूर्ण पौधे की सेहत बनी रहे। फिर धीरे-धीरे ऑर्गेनिक प्लांट फूड डालें, शुरुआत में सिर्फ 1/4 निर्माता मात्रा से, तथा धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
5. मिड वेज | सप्ताह 3-4
सप्ताह 3 और 4 के दौरान अपने Blackberry Auto की जबरदस्त वेजिटेटिव ग्रोथ का इंतजार करें! तापमान और आद्रता की सटीकता को लेकर ज्यादा न घबराएँ, अब पौधा परिपक्व हो चुका है और कई तरह की स्थितियाँ सहन कर सकता है।

यह Indica-प्रधान खूबसूरती Sativa स्ट्रेनों जैसी ऊँचाई नहीं पकड़ेगी। इसकी कॉम्पैक्ट संरचना इसे जमीन के करीब और संभालने योग्य बनाए रखती है, जिससे आप इसकी सेहत और ताकत पर ध्यान दे सकते हैं।

ट्रेनिंग की बात करें तो, Blackberry Auto जैसी छोटी और झाड़ीदार ऑटोफ्लावर्स बिना किसी हस्तक्षेप के अच्छे से फलती-फूलती हैं। इनके नैचुरल ग्रोथ पैटर्न इन्हें लो-प्रोफाइल और संतुलित रखता है। तो बस बैठिए और अपने पौधे को बिना किसी अतिरिक्त ट्रेनिंग के बढ़ने दीजिए।

अगर आप पौधों को ट्रेनिंग देने के इतने आदी हैं कि Blackberry Auto को भी वैसा करना चाहते हैं, तो हम HST जैसा कोई अति आक्रामक तरीका नहीं सुझाते। आप टाई-डाउन मेथड से सारी छतरी मैनेजमेंट कर सकते हैं।

जैसे-जैसे आपका पौधा फैलता है, उसे पोषण की जरूरत भी बढ़ती है। Blackberry जैसी Indica-प्रधान ऑटोफ्लावर्स की भूख थोड़ी ज्यादा हो सकती है। इन्हें हल्के-से ज्यादा न्यूट्रिएंट डोज सहन होते हैं, लेकिन ओवरफीडिंग से बचें। उनकी प्रतिक्रिया देखें और संतुलित फीडिंग शेड्यूल बनाए रखें।

जैसे-जैसे वेजिटेटिव स्टेज खत्म होने के करीब आती है, याद रखें कि फ्लावरिंग शुरू होते ही नए ब्रांचेज़ नहीं निकलेंगे। इससे बड साइट्स और अंतिम उपज सीमित हो जाती है। इसलिए छतरी के स्पेस का पूरी तरह उपयोग करें और सही पोषण दें।

6. ट्रांजिशन (प्री-फ्लावर) | सप्ताह 5
जैसे ही आपका कैनबिस पौधा प्री-फ्लावरिंग स्टेज में जाता है, लगातार समान और आरामदायक वातावरण बनाए रखना ही सबसे अच्छा तरीका है। दिन के समय तापमान लगभग 73-77°F (23-25°C) और रात को थोड़ा ठंडा रखें। पौधे को सांस लेने के लिए 40-50% के आसपास रिलेटिव ह्यूमिडिटी दें। और लाइट दिन में 18-24 घंटे तक रखें, जैसे पहले रखते थे—ऑटोफ्लावर्स को फ्लावरिंग शुरू करने के लिए लाइट शेड्यूल बदलने की जरूरत नहीं होती।

अगर आप इस समय अपने पौधों को ध्यान से देखें तो प्री-फ्लावर्स नजर आएंगे—छोटी सफेद बालें, सबसे पहले पौधे के बीच में उभरेंगी और फिर टॉप पर ज्यादा घनी होंगी। रेगुलर स्ट्रेनों में यह स्टेज लाइट ज्यादा मिलने पर कभी खत्म नहीं होती, लेकिन ऑटोफ्लावर्स जल्दी ही फुल फ्लावरिंग में कूद जाते हैं—लाइट शेड्यूल की परवाह किए बिना।

ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ेगा, टॉप्स पर पीला रंग और सफेद बालों की परत आएगी, और बहुत पतली नाजुक पत्तियां दिखेंगी। आपकी ऑटोफ्लावर बयां कर रही है कि अब हार्वेस्ट समय पास आ रहा है।

अब, जानिए एक मजेदार बात: मॉडर्न ऑटोफ्लावर्स, चाहे वो Indica हों या Sativa (या इनके हाइब्रिड), सब एक ही समय पर फ्लावरिंग पार्टी में शामिल होते हैं। जीनब्रीडर्स ने जिन्हें जल्दी हार्वेस्टिंग के लिए डिज़ाइन किया है, उन्हीं की बदौलत ऐसा होता है।

अब आपको फर्टिलाइजर शेड्यूल तुरंत बदलने की जरूरत नहीं (ये काम बाद में आएगा), लेकिन कई ग्रोअर्स इसी स्टेज में न्यूट्रिएंट बदल सकते हैं। नाइट्रोजन-समृद्ध फॉर्मूला की जगह फॉस्फोरस (P) और पोटैशियम (K) प्रमुख वाले फॉर्मूला को दें, जो फूलों के लिए जरूरी हैं।
7. शुरुआती फ्लावर | सप्ताह 6-7
चलिए, अब आते हैं कैनबिस फ्लावरिंग के रोमांचक संसार में! सप्ताह 6 और 7 पर चीजें वास्तव में रोचक होने लगती हैं। माहौल को थोड़ा ठंडा रखें। और नमी का ख्याल रखें—जैसे ही बड्स मोटे होने लगें, इसे घटा दें।

अब देखिए जब पौधा फ्लावरिंग स्ट्रेच में जाता है, तो यह सुपरहीरो की तरह अपनी शाखाएँ आगे-पीछे फैलाता है। कभी-कभी यह सिर्फ दो हफ्तों में आकार में दोगुना तक हो सकता है।

अब मान लीजिए, पौधा बहुत झाड़ीदार हो गया और पत्तियाँ हवा का बहाव रोक रही हों या छोटे बड साइट्स पर छाया कर रही हों। चिंता नहीं करें, बस थोड़ा छांटलें। पर ज्यादा काटें नहीं! हल्की ट्रिमिंग काफी है।

ये फूल अभी छोटे और हल्के लग सकते हैं, पर धोखा मत खाइए। ये अभी शुरुआत हैं। थोड़ा और वक्त दीजिए, इन्हीं से वो बड़े, घने कोलाज बनेंगे जिनका आप सपना देखते थे।

जैसे ही पौधा बड़ा होता है, इसकी प्यास भी बढ़ती है। छोटे पौधों को हर कुछ दिन में पानी चाहिए, लेकिन बड़े पौधों को हर दूसरे दिन या रोजाना। कंटेनर उठाकर देखें—अगर हल्का लगे तो पानी देने का समय है।
अब बात करते हैं भोजन की—हर पौधे का फेवरेट मुद्दा! फ्लावरिंग के दौरान आपकी गांजा का भूख बढ़ेगा। न्यूट्रिएंट्स की मात्रा बढ़ाइये। लेकिन प्लांट की सेहत पर नजर रखें, ताकि अधिक फीडिंग से कोई नुकसान न हो।

न्यूट्रिएंट्स की बात करें तो, अब पौधे को फ्लावरिंग के लिए खास न्यूट्रिएंट्स चाहिए। फॉस्फोरस और पोटैशियम—अब ये स्टार बन जाते हैं। नाइट्रोजन की जरूरत कम हो जाती है। इस समय जरा भी नाइट्रोजन ज्यादा हो गया तो मुसीबत हो सकती है, बैलेंस पर ध्यान दें।
8. मिड फ्लावर (बल्क फेज) | सप्ताह 8-9
अब जब आपके वीड पौधे आखिरकार पूरा वजन बढ़ा रहे हैं, तो दो बातों पर ध्यान दें: वेंटिलेशन और नमी। बासी हवा नहीं रहने देना है, वरना फफूंदी, बड रॉट और दूसरे फंगल इंफेक्शंस का खतरा रहता है। इन घने फूलों में ऐसे अवांछित तत्व तेजी से विकसित होते हैं।

जब आपकी गांजा खुश है, तो नोड्स पर फूल धीरे-धीरे फैलेंगे और शाखाओं की पूरी लंबाई पर घने कोलाज बन जाएंगे।

रोचक बात यह है कि वे न केवल ज्यादा बड़े दिखते हैं बल्कि अंदर से घनत्व में भी अधिक हो जाते हैं। लेकिन अभी Blackberry Auto हार्वेस्ट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। पिस्टिल्स अभी भी हरे-सफेद और अधपके लगते हैं।

अच्छे ऑटोफ्लावर्स जैसे Blackberry Auto इस स्टेज में चिपचिपे होने लगते हैं। क्यों? क्योंकि ट्राइकोम नाम की रेजिन ग्रंथियाँ कैलीक्स और निकट की छोटी पत्तियों पर दिखना शुरू हो जाती हैं।
ये ट्राइकोम THC और अन्य कैनाबिनोइड्स से भरे होते हैं—तो जब भी पौधे पर "शक्कर" जमे दिखें, समझिए हार्वेस्ट के समय बेहतरीन ताकत मिलने वाली है। ट्राइकोम में टरपींस भी होती हैं, जो गांजा की खास खुशबू देती हैं। तैयार हो जाइए ज़बरदस्त महक के लिए!

अच्छी बात है कि बड्स बनने से पहले ही पौधा स्ट्रेचिंग बंद कर देता है। अब से ले कर हार्वेस्ट तक आकार लगभग इसी तरह रहेगा। नीचे दी हुई टेबल से जान सकते हैं कि इंडोर ग्रो में Blackberry Auto सप्ताह-दर-सप्ताह कितना बढ़ेगा।

अब चिंता छोड़िए कि पौधे टॉवर बन जाएंगे—Blackberry Auto के साथ ऐसा कभी नहीं होता। अब असली फोकस पानी और पोषण पर है। यही अंतिम स्टेज है जब आप अपने पौधे को खाना दे रहे होंगे, तो हर भोजन मायने रखता है।

फॉस्फोरस और पोटैशियम पर विशेष ध्यान दें—अब वही सुपरस्टार्स हैं। यह आपके रेगुलर न्यूट्रिएंट्स या पी.के.-बूस्टर में मिल सकता है। और अब आगे क्या? धीरे-धीरे न्यूट्रिएंट कम करेंगे और सिर्फ साफ पानी पर स्विच करेंगे।
9. पकना और कटाई | सप्ताह 10 (और आगे)
अब आप हार्वेस्ट के एकदम अंतिम चरण में हैं। ये उस विशाल फायरवर्क्स शो का ग्रैंड फिनाले है, जिसमें सब बड्स आपकी इंद्रियों को लुभाने जा रहे हैं। पर फसल काटने से पहले कुछ जरूरी बातें हैं। तो अपना मैग्निफाइंग ग्लास निकालिए और गहराई में उतरते हैं!
सबसे पहले, नमी नियंत्रित रखें और माहौल ठंडा रखें। आप नहीं चाहेंगे कि आपके बेशकीमती बड्स में फफूंदी लग जाए या टरपींस खतम हो जाएं। फंगस को आप की मेहनत का माहौल बहुत पसंद है—अच्छी वेंटिलेशन और कम ह्यूमिडिटी आपके हथियार हैं।

जैसे-जैसे ब्रीडर के अनुमानित आख़िर की घड़ी नजदीक आती है, आपके बड्स पर परिपक्वता के संकेत नजर आएंगे। जैसे बच्चों को बड़ा होते देखना, फर्क ये है कि ये बच्चे रेजिन से भरे “स्टिकी” हैं। पिस्टिल्स पर नजर रखें; अगर वे अभी भी बिल्कुल सफेद हैं तो हार्वेस्ट के लिए तैयार नहीं हुए। लेकिन जैसे ही वे भूरे या नारंगी रंग में बदलने लगें, समझिए समय आ गया।

अब असली मजा शुरू होता है। अपना लूप या माइक्रोस्कोप निकालिए, और ट्राइकोम्स पर गौर करें। ये छोटी रेजिन फैक्टरियां असली वीआईपी हैं—इनमें सारा अच्छा माल है। माइक्रोस्कोप के अंदर इन्हें दूधिया या क्लाउडी दिखना चाहिए—बस कुछ एम्बर भी हों तो बेस्ट। यही बेस्ट हार्वेस्ट पॉइंट है—अबbuds और पोटेंट नहीं होंगे।

थोड़ा और धैर्य रखें! परफेक्शन से पहले ही न्यूट्रिएंट का सप्लाई काटना है और अपनी ऑटोफ्लावर को अच्छे से फ्लश करनी है। फ्लशिंग में समय लगता है—मिट्टी में करीब दो हफ्ते और हाइड्रोपोनिक सिस्टम्स में लगभग एक सप्ताह।

समझ लीजिए, अभी रास्ता बाकी है! ड्रायिंग और क्योरिंग कैनबिस की अंतिम प्रक्रिया है। जल्दीबाजी न करें; ये सबसे महत्वपूर्ण स्टेप्स हैं। ब्रांचेस को उल्टा लटका कर 5-7 दिन सुखाएँ, फिर ग्लास जार में डाल कर नियमित रूप से ढक्कन खोलें ताकि नमी बाहर और ताजा हवा अंदर जाए।
10. परिणाम
अपनी कॉम्पैक्ट साइज के बावजूद, Blackberry Auto लगातार भरपूर यील्ड देती है, जैसा कि हमारे सप्ताह-दर-सप्ताह गाइड में सभी 4 ग्रोअर्स ने दिखाया है। नीचे दी गई टेबल से देख सकते हैं कि DWC विधि यील्ड के मामले में सबसे बढ़िया साबित हो सकती है, लेकिन मिट्टी में भी अगर आप Blackberry Auto को मल्टी-शाखा वाला प्लांट बना कर ट्रेंड करें तो अद्भुत नतीजे मिल सकते हैं। अगर ट्रेनिंग ना पसंद हो तो SOG स्टाइल (सी-ऑफ-ग्रीन) में ग्रो करें, छोटे पौधे होंगे और आपको अधिक पौधे साथ-साथ लगाने होंगे ताकि उपलब्ध स्पेस का पूरा इस्तेमाल हो सके।

Blackberry Auto यील्ड
हमारे गाइड के रिकॉर्डधारी, ग्रोअर A ने अपनी केवल एक Blackberry पौधे से बहुतेरे बड़े कोलाज लिए, और ड्राय वेट में कुल 190g (6.7 oz) मिला।

ग्रोअर B ने एक बड़े SOG ग्रो में 2 Blackberry ऑटोफ्लावर उगाए और प्रति पौधे 43g (1.5 oz) की सम्मानजनक उपज पाई।

DWC और ScrOG का उपयोग कर ग्रोअर C को एक बड़ा शाखायुक्त पौधा मिला, और अपने एक Blackberry Auto से 154g (5.43 oz) कटाई की।

अंत में, ग्रोअर D का Blackberry, SOG सेटअप में उगाया गया, 82.5g (2.91 oz) भरा पूरा, घना और बड़ा बड्स लाया जिनकी बैग अपील परफेक्ट थी।

Blackberry Auto स्मोक रिपोर्ट
कई स्मोक रिपोर्ट्स में Blackberry Auto एक ऐसा स्ट्रेन बताया गया है जो आपको रिलैक्स, खुश और भूखा बना देगा। इसमें स्ट्रॉन्ग इंडिका इफेक्ट होता है, जो रात के समय इस्तेमाल, नींद और मन्चीज़ के लिए परफेक्ट है। इसका स्वाद और खुशबू मीठी, फ्रूटी और हल्की पाइन-एर्थी टोन के साथ आता है। पावरफुल स्ट्रेन है–यह आपकी बॉडी को भारी कर देगा और सोफे से चिपका देगा। अगर आप ढील-मिलाकर, आराम के साथ स्नैक्स एन्जॉय करना चाहते हैं तो Blackberry Auto आपके लिए है।

10. निष्कर्ष
हम Blackberry Auto सप्ताह-दर-सप्ताह समीक्षा का समापन इस आश्वासन के साथ कर सकते हैं कि यह ऑटोफ्लावर उगाने में आसान, भरोसेमंद, बहुउद्देश्यीय और लगातार टॉप-क्वालिटी बड्स देने वाला स्ट्रेन है। साथ ही, कुछ टिप्पणियाँ भी हैं अलग-अलग ग्रोइंग स्टाइल और उनके परिणामों पर।
वेग में समय न गवाएँ क्योंकि Blackberry Auto में वेजिटेटिव स्टेज बहुत छोटा होता है, और एक बार फ्लावरिंग शुरू हो गई, आगे की वृद्धि व्यावहारिक रूप से रुक जाती है—सिर्फ हल्का स्ट्रेचिंग दिखेगी, लेकिन और ब्रांचेज़ और बड साइट्स की उम्मीद न करें। जो है, उसमें ही संतुष्ट रहें।
ग्रोअर A ने शुरूआती वेज चरण में पौधे को बिना छेड़े छोड़ा और बाद में LST (लो-स्ट्रेस ट्रेनिंग) की। नतीजा स्वस्थ पौधा रहा जिसकी छतरी फ्लैट थी और उसमें कई ब्रांचेज थीं। हार्वेस्ट में शानदार यील्ड मिली।
ग्रोअर B के लिए Blackberry केवल टेंट में उगाए ढेर सारे ऑटोफ्लावर्स में से दो थे। ये भी बहुत अच्छा तरीका है, पर जब जेनेटिक्स Blackberry जैसी उम्दा हो, तो काश पूरा स्पेस इन्हीं के लिए रख पाते।
ग्रोअर D ने भी SOG मेथड अपनाया, लेकिन शायद कोको कॉयर इस्तेमाल करने के कारण पौधे का आकार और अंतिम परिणाम ज्यादा प्रभावशाली रहा।
अंत में, ग्रोअर C हमारे गाइड में अकेले थे जिन्होंने डीप-वॉटर कल्चर (DWC) चुना। इस तकनीक से सबसे अच्छा यील्ड पोटेंशियल मिलता है, लेकिन शुरू से ही फीडिंग सही मिलानी होती है। बदकिस्मती से, माली सेडलिंग और अर्ली-वेज चरण में सर्वश्रेष्ठ नहीं कर पाए। परिणाम प्रभावशाली रहा, लेकिन Blackberry Auto जैसी टॉप-क्लास जेनेटिक्स के साथ और भी बेहतर हो सकता था।
बस इतना ही, दोस्तों! हमें उम्मीद है कि हमारा गाइड आपके लिए उपयोगी साबित होगा और हमारी टिप्स आपकी Blackberry Auto ग्रो को शानदार बनाएगी।
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