लक्ज़मबर्ग सरकार ने गांजा वैधीकरण बिल को मंज़ूरी दी
पिछले हफ्ते, लक्ज़मबर्ग सरकार ने एक बिल को मंज़ूरी दी जो देश में गांजे के व्यापक वैधीकरण की दिशा में एक और कदम है। यह बिल 1973 के पुराने कानून में संशोधन करेगा, जिसमें औषधीय उपयोग के लिए गांजे के नियम और नशे की लत से लड़ने के दिशानिर्देश थे।
यह महसूस किया गया कि ड्रग्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के बावजूद मनो-सक्रिय पदार्थों का उपयोग रोकने में असफल रहा है। इसी के चलते लिबरल, सोशल डेमोक्रेट और ग्रीन दलों के गठबंधन ने ड्रग नीति बदलने की योजना बनाई। 2018 में स्वास्थ्य मंत्री द्वारा तैयार इस योजना को कोविड-19 महामारी के कारण रोक दिया गया था, लेकिन 2021 में इसे फिर से जीवित किया गया। आखिरकार, यह योजना मनोरंजनात्मक गांजा बिक्री को वैध कर देगी।
घर में उगाई और निजी मात्रा में रख-रखाव
जहाँ अंतिम लक्ष्य उत्पादन सुविधाएं और सप्लाई चेन के साथ-साथ राज्य-नियंत्रित गुणवत्ता निगरानी तंत्र स्थापित करना है, वहीं नया कानून घर में गांजा उगाने का विकल्प भी देता है। वयस्कों को अधिकतम चार पौधे उगाने की अनुमति होगी, लेकिन वे उत्पाद को केवल घर पर ही सेवन कर सकेंगे। सार्वजनिक स्थानों पर सेवन प्रतिबंधित रहेगा।
हालांकि, सरकार ने साधारण रख-रखाव के लिए दंड को नरम करने का फैसला किया है। अब, अगर आपके पास 3 ग्राम तक वीड (गांजा) है तो यह एक हल्का अपराध माना जाएगा और €25 का जुर्माना लगेगा - जो पहले से दस गुना कम है।

अवैध तस्करी पर लगाम लगाना
जहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका में वैधीकरण पहलों को राज्य की आय में मारिजुआना टैक्स से जोड़कर देखा जाता है, वहीं लक्ज़मबर्ग और यूरोप में, घोषित लक्ष्य आपराधिक गिरोहों से पैसा छीनना है। औपचारिक बिक्री से जो भी टैक्स आएगा, वह नशा निवारण और जन-शिक्षा कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।
लक्ज़मबर्ग यूरोप के उन पहले देशों में से है जिसने गांजा नीति में अधिक यथार्थवादी रुख अपनाया है। दिसंबर 2021 में माल्टा ने इस पदार्थ के उपयोग और खेती को वैध किया, और स्विट्जरलैंड ने सीमित संख्या में मनोरंजनात्मक उपभोक्ताओं के लिए कई शहर-आधारित पायलट प्रोग्राम शुरू करने का फैसला किया। जर्मनी की नई सरकार ने भी अगले चुनाव से पहले एक विनियमित गांजा बाज़ार बनाने का वादा किया है।
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