हद से ज्यादा अन्यायपूर्ण: क्यों मादक दवाओं के विरोधी कानूनों में अब बदलाव जरूरी है
हाल की सुर्ख़ियाँ फिर याद दिलाती हैं कि गांजा नीति हमेशा उन लोगों के बीच रस्साकशी बनी रहती है जो इस और अन्य अवैध पदार्थों के लिए अधिक समझदारी भरी सोच चाहते हैं और वे लोग जो यथास्थिति बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं।
जहां निषेध समर्थक समाज को एक और हानिकारक दवा के अज्ञात परिणामों से बचाने का दावा करते हैं, वहीं सुधार के पक्षधर तर्क देते हैं कि इसमें कोई नई चीज़ नहीं है। गांजा लंबे समय से हमारी ज़िंदगी का हिस्सा रहा है, दुनिया भर में करोड़ों लोग इसे अवैध रूप से इस्तेमाल करते हैं, और उनमें से कई लोग असफल निषेध नीति का पूरा खामियाजा भुगतते हैं।
जब 'एंटी-ड्रग' होना उल्टा पड़ जाए
बिली हुड, जो दुबई में बच्चों की फुटबॉल टीम कोचिंग करने वाले पूर्व सेमी-प्रो सॉकर खिलाड़ी हैं, को यूएई में 25 साल की सजा सुनाई गई है। उनका भयानक अपराध था- कार में चार CBD की बोतलें और एक वेप पेन रखना। ये तो उनके भी नहीं थे — युवक ने कहा कि ये शायद उसके दोस्त के थे, जिसे वह अभी-अभी एयरपोर्ट से लेकर आया था।
25 साल के इस एथलीट ने यह भी कहा कि उसने दबाव में अपना दोष कबूल किया। 4 दिनों तक उसे वकील या किसी से मिलने का अधिकार नहीं मिला। पुलिस ने यह भी धमकी दी कि अगर वह दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं करता तो उसे कभी हिरासत से निकलने नहीं दिया जाएगा — जबकि वह दस्तावेज़ अरबी में था, जिसे वह समझ भी नहीं सकता था।
हुड के परिवार और दोस्त इस फैसले से सदमे में हैं, जो तय करता है कि अब वह युवक पचास साल का होने पर ही जेल से बाहर आएगा। CBD UK में वैध है, जहाँ मरीज इसे दर्द राहत या चिंता कम करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनमें THC के हल्के अवशेष हो सकते हैं, और यही तेल यूएई के कानून में 'खतरनाक मादक पदार्थ' बन जाता है।
विडंबना यह है कि हुड खुद को पूरी तरह ड्रग्स के खिलाफ मानते हैं। आज भी उन्हें भरोसा नहीं हो रहा कि वे ऐसे देश में ड्रग अपराध के लिए दोषी करार दिए गए, जिसकी — उनके ही शब्दों में — 'विश्वास और मूल्य' उनके जैसे ही हैं। इसे कहते हैं गुलाबी चश्मा पहनना!
सिंगापुर में सैकड़ों को ड्रग अपराध पर फांसी
हाल ही में अर्जी खारिज होने के बाद सिंगापुर की सर्वोच्च अदालत ने 41 वर्षीय युवक की किस्मत पर मुहर लगा दी, जिसे देश में एक किलो गांजा लाने पर फांसी दी जाएगी।

ओमर याकूब बामाधाज के वकील कहते हैं कि सीमा से गुजरते समय वह नहीं जानते थे कि उनकी गाड़ी में जो पार्सल था उसमें क्या था। बामाधाज के बुजुर्ग पिता भी उनके साथ थे, जब पुलिस को ड्रग्स मिले। बामाधाज का कहना है कि जांचकर्ताओं ने धमकी दी थी कि अगर उन्होंने अपराध कबूल नहीं किया तो उन्हें और उनके पिता दोनों को फांसी दे दी जाएगी। हम उस समय की असलियत पर शक कर सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अब कानूनी प्रक्रिया फांसी के रास्ते में कोई बाधा नहीं है।
सिंगापुर अवैध पदार्थों के लिए जीरो टॉलरेंस रखता है और सालों में सैकड़ों अपराधियों को फांसी दे चुका है, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। यह शायद फिलीपींस के राष्ट्रपति की तरह खुलेआम ‘ड्रग तस्करों’ को सड़क पर गोली मारने जैसा नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन सिंगापुर के कठोर मादक पदार्थ विरोधी कानूनों को अस्वीकार्य मानते हैं। हैरत की बात ये है कि इस सिटी-स्टेट के लोग भी इन नीतियों का समर्थन करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे अपराध दर कम होती है।
प्रतिभा की बर्बादी
ड्रग वॉर के दूसरे, कुछ कम खूनी छोर पर, ब्रिटिश रैपर नाइन्स को 28 किलोग्राम गांजा स्पेन और पोलैंड से UK में तस्करी करने के षड्यंत्र में जेल भेजा गया है।

यह दूसरी बार है जब 31 वर्षीय इस कलाकार पर गांजा से जुड़े अपराध में आरोप लगा है। पहले भी वह 'सप्लाई के इरादे से कब्जे' के लिए 18 महीने जेल काट चुके हैं। अब, 'Crabs In A Bucket' एल्बम के लेखक को फिर 28 महीने जेल रहना होगा।
यहां तक कि जज ने भी, जिसने उसे और उसके दोस्त को सज़ा दी, इसे प्रतिभा की बर्बादी कहा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी नज़र में ग़लती रैपर की है, या यह दुखद तथ्य है कि उसे उस पदार्थ के लिए आज़ादी खोनी पड़ रही है, जो अब कई देशों में कानूनी रूप से बेचा जा रहा है।
जर्मन पुलिस बनाम गांजा वैधीकरण
हाल ही में जर्मनी के चुनाव में उन पार्टियों को समर्थन मिला है जो गांजा पर व्यापक सुधार चाहती हैं। हालांकि, देश की पुलिस यूनियनें किसी भी बदलाव के कड़ाई से विरोधी हैं।
वे नहीं मानतीं कि अवैध पदार्थों पर सख्त रुख अब तक इनके इस्तेमाल को रोकने में नाकाम रहा है। और उन्हें उन देशों के उदाहरणों पर भी भरोसा नहीं है, जैसे पुर्तगाल ने दवाओं को चिकित्सा मुद्दा मानकर पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर दिया।
जर्मन पुलिस यूनियन के प्रमुख रीनर वेन्ड्ट चेतावनी देते हैं कि गांजा वैधीकरण 'स्टोंड एज' की शुरुआत होगा, जो देश के 21वीं सदी के एजेंडे के बिल्कुल विपरीत है। विडंबना ये कि अब गठबंधन की बातचीत कर रहीं पार्टियाँ ठीक इसका उल्टा कहती हैं — कि असली रुकावट तो निषेध नीति है, जो अच्छे भविष्य में बाधा बन रही है।
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