पर्पल लेमोनेड ऑटो कैनाबिस स्ट्रेन सप्ताह-दर-सप्ताह गाइड
- 1. ग्रो स्पेसिफिकेशंस
- 2. ग्रो सेटअप
- 3. अंकुरण और सीडलिंग अवस्था | सप्ताह 1
- 4. शुरुआती वेज | सप्ताह 2
- 5. मिड वेज | सप्ताह 3-4
- 6. ट्रांजिशन (प्री-फ्लावर) | सप्ताह 5
- 7. शुरुआती फ्लावर | सप्ताह 6-7
- 8. मध्य फ्लावर (बुल्क फेज) | सप्ताह 8-9
- 9. पकना और हार्वेस्ट | सप्ताह 10
- 10. यील्ड और स्मोक रिपोर्ट
- 11. निष्कर्ष
अब तक की हमारी सबसे एडवांस पर्पल जेनेटिक्स, पर्पल लेमोनेड ऑटो में जबरदस्त बैग अपील है। गहरे रंग की मोटी कलियाँ THC क्रिस्टल्स से जमी हुई हैं और उन पर चमकीले नारंगी पिस्टिल्स हैं। चमकदार हरे शुगर लीव्स इस सुंदरता को पूरा करते हैं। ताजगी से भरा खट्टा-मीठा स्वाद और रिलैक्सिंग व मोटिवेटिंग हाई भी टॉप-क्लास है।
पर्पल लेमोनेड ऑटोफ्लावर को सप्ताह दर सप्ताह किस तरह से उगाना है, यह जानें - इसकी ग्रो साइकिल के असली अनुभव को फॉलो करें। हम आपको बीज से हार्वेस्ट तक की उसकी टाइमलाइन समझाएंगे ताकि आप सभी ग्रो चरणों (वनस्पतिक अवस्था से लेकर प्री-फ्लावरिंग और फ्लावरिंग के अलग-अलग फेज़) पर आसानी से नियंत्रण रख सकें।
1. ग्रो स्पेसिफिकेशंस
पर्पल लेमोनेड ऑटो, FastBuds कलेक्शन में सबसे ऊँची स्ट्रेनों में से एक है। इसका सेंट्रल कोला हार्वेस्ट के समय 70–120 सेमी (28–47 इंच) ऊँचाई तक जा सकता है। झाड़ी में साइड ब्रांचेज भी बहुत मजबूत और मोटी होती हैं। इस वजह से भारी मात्रा में यील्ड मिलती है: 400–500 ग्रा/मी2 (1.3–1.6 औंस/फीट2) इंडोर और 50–250 ग्रा (2–9 औंस) प्रति पौधा आउटडोर।
इस किस्म में लगभग 70% Indica जेनेटिक्स होने से यह मजबूत और अधिक यील्डिंग है। बाकी 30% Sativa के कारण इंटर्नोड्स लंबे, बुश स्ट्रक्चर खुला और बड्स ढीले और मोटे होते हैं। यह स्ट्रेन हाइब्रिड ताकत भी शानदार देती है।
और—जैसा कि आप उम्मीद करेंगे—अधिकतर पौधों में कलियों और शुगर लीव्स पर शानदार रंग दिखता है। कुछ फिनोज़ गहरे बैंगनी, कुछ हल्के रंग वाले, पर सभी ट्राइकोम्स से भरपूर और बेहद स्वादिष्ट महक वाले होते हैं। तैयार फसल का स्वाद टरपीन से भरपूर और जोरदार है, जिसमें 22% THC तक की ताकत है।

तो, जब आप पर्पल लेमोनेड ऑटो की बड्स को जॉइंट, बोंग बाउल या ब्लंट में डालेंगे, तो क्या उम्मीद रख सकते हैं? अच्छे से तैयार हो जाएँ क्योंकि आपको आराम देने वाली गहरी रिलैक्सिंग फीलिंग मिलने वाली है। इसका हाई THC कंटेंट पहले ही कश के कुछ सेकंड्स में असर दिखाएगा। आप इसे एक सुकून की लहर की तरह अनुभव करेंगे, जो शरीर के हर हिस्से को ढीलापन और आराम देगा। टेंशन दूर हो जाएगी और बस सुकून रह जाएगा।
लेकिन पूरी क्रेडिट THC को नहीं जाता। रिसर्च से पता चला है कि टरपीन भी किसी स्ट्रेन के इफेक्ट में बहुत अहम् भूमिका निभाते हैं - केवल खुशबू और स्वाद नहीं, बल्कि शानदार असर भी। कुछ टरपीन एंडोकैनाबिनोइड सिस्टम के रिसेप्टर्स से जुड़ सकते हैं, वहीं जहाँ THC और अन्य कैनाबिनोइड्स लगकर अपना असर दिखाते हैं। टरपीन अपने-आप में अलग असर देते हैं, जैसे THC से होने वाली शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस को कम करना, या मूड को बेहतर बनाना। लेकिन ये कैनाबिनोइड्स के साथ मिलकर काम करते हैं और एक यूनिक एंट्राज इफेक्ट बनाते हैं।
पर्पल लेमोनेड ऑटो के मामले में, इसके फलिया और मिट्टी जैसे टरपीन THC के साथ मिलकर यूफोरिक और फिजिकल हाई देते हैं, जिससे आप आराम करने, म्यूजिक सुनने या गहरी बातें करने के मूड में आ जाते हैं, और हो सकता है, थोड़ी देर में फ्रिज भी लूट लें। यह आकर्षक किस्म रिलैक्सिंग दोपहर या शाम के लिए बेहतरीन है। वेक-एंड-बेक के लिए नहीं (जब तक आपका टॉलरेंस बहुत ज्यादा न हो)। यह स्ट्रेन बीच पर, झूले पर या हल्की वॉक के दौरान सबसे अच्छी लगती है।
2. ग्रो सेटअप
पर्पल लेमोनेड ऑटो अपेक्षाकृत नई किस्म है, लेकिन ऑनलाइन पहले ही कई डिटेल्ड ग्रो डायरीज़, अच्छी तस्वीरों के साथ उपलब्ध हैं। हमने ऐसी ग्रो साइकिल चुनी जहाँ ग्रोअर को ज्यादा अनुभव नहीं था, लेकिन नतीजे कमाल के आए। इससे दिखता है कि यह किस्म खुद ही संभल सकती है।
एक ग्रोअर ने AHG2020 नाम से 2’x2’ या 60x60x200cm की Black Orchid टेंट - एक ऑटोफ्लावर के लिए पर्याप्त जगह है, भले ही वह काफी बड़ा हो। पादप के पूरे जीवनकाल के लिए उन्होंने Mars Hydro TS 1000 LED लाइट (सिर्फ 150W) का उपयोग किया।
| ग्रो स्पेस: | 0.37 मी2 (4 फीट2) | पॉट साइज़: | 20 लिटर (5.3 गैलन) |
|---|---|---|---|
| बीज से हार्वेस्ट: | 10 सप्ताह | मीडियम: | 50/50 मिट्टी/पर्लाइट |
| फ्लावरिंग: | 6 सप्ताह | न्यूट्रिएंट्स: | सिंथेटिक/ऑर्गेनिक |
| लाइट साइकिल: | 20/4 | pH स्तर: | 6.5 |
| लाइट टाइप: | LED | दैनिक तापमान: | 26–28°C (79–82°F) |
| वॉट्स इस्तेमाल किए गए: | 150 | ह्यूमिडिटी: | 55% ↘ 40% |
लाइट ज्यादा गर्मी नहीं देती, फिर भी ग्रोअर ने वेंटिलेशन को गंभीरता से लिया: एक एग्जॉस्ट फैन के अलावा, एक छोटा इनटेक फैन और साथ में 8” क्लिप-ऑन फैन भी लगाई ताकि टेंट के अंदर हवा घूमती रहे।
कठोर तार से बना सहारा 20L (5.28 गैल.) नॉन-वोवन ग्रो बैग को पकड़ता है। एक और तार टेंट के चारों ओर (करीब घुटनों की ऊँचाई पर) लगा दिया है ताकि नेगेटिव प्रेशर के कारण टेंट की दीवारें अंदर न गिरें।

3. अंकुरण और सीडलिंग अवस्था | सप्ताह 1
ऑटोफ्लावरिंग बीजों को अंकुरित करने के कई तरीके हैं, आप कोई भी चुन सकते हैं, बशर्ते आप दो चीजों का ध्यान रखें: गर्म तापमान और नमी। जब बीज अंकुरण हो जाए, उसे सीधे अंतिम कंटेनर में लगाना बेहतर है ताकि जड़ों को ट्रांसप्लांट के झटके से बचाया जा सके। यह सलाह सबसे हार्डी ऑटोफ्लावर्स पर भी लागू होती है, जैसे पर्पल लेमोनेड ऑटो।
| पौधे की ऊँचाई: | 1" (2.5 सेमी) | ह्यूमिडिटी: | 55% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 24" (61 सेमी) | प्रति दिन पानी: | 0.08 गैलन (0.3 लीटर) |
| दिन का तापमान: | 82°F (28°C) | pH: | 6.5 |
| रात का तापमान: | 70°F (21°C) | महक: | कोई नहीं |
ग्रोअर ने एक पर्पल लेमोनेड ऑटो बीज को 24 घंटे के लिए भिंगोया, फिर 3 दिन तक गीले पेपर टॉवल में रखा। उसके बाद, सीधे 20L के फैब्रिक पॉट में बीज लगा दिया।
मीडियम के तौर पर, उन्होंने Biobizz लाइट मिट्टी और पर्लाइट (50/50) का मिश्रण इस्तेमाल किया।
आमतौर पर लोग करीब 20% पर्लाइट मिलाते हैं। पर्लाइट (जो नहीं जानते उनके लिए) मिट्टी को हल्का और हवादार रखती है, जड़ों को सांसे लेने को ऑक्सीजन देती है।
अगर आप कम पर्लाइट मिलाएँगे, तो मिट्टी नमी ज्यादा रोकेगी लेकिन जड़ों का सांस लेना मुश्किल होगा। ज्यादा पर्लाइट में तो सांस आसानी से मिलेगी, लेकिन पानी जल्दी भागेगा, ज़्यादा बार सींचने की जरूरत पड़ेगी। मिट्टी-पर्लाइट अनुपात चुनते समय इसी बैलेंस पर ध्यान दें।
जब बीज अंकुरित हुआ, तो ग्रोअर ने पानी की बोतल के नीचे के हिस्से को सीडलिंग के ऊपर ढक्कन की तरह लगा दिया ताकि ह्यूमिडिटी डोम मिले। बीज के आसपास दो बार, और डोम के अंदर तीन बार स्प्रे किया ताकि नमी बनी रहे।

पर्पल लेमोनेड ऑटो या कोई भी कैनाबिस स्ट्रेन उगाते समय नमी और पानी के प्रबंधन पर खास ध्यान देना चाहिए। ग्रो साइकिल के इस नाजुक दौर में छोटे पौधे फंगस-बैक्टीरिया के प्रति संवेदनशील होते हैं। बहुत गीली और नम वातावारण में कई बीमारियाँ तेजी से पनपती हैं। कई शुरुआती उगाने वाले ओवरवॉटरिंग से पौधों को नुकसान पहुँचा बैठते हैं - इससे जड़ तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती और पौधों की मौत हो सकती है। जड़ें भी ऑक्सिजन लेती हैं, पानी ज़्यादा हो तो पौधा घुटने लगता है। कई रोग ऑक्सीजन-रहित (anaerobic) वातावरण में पनपते हैं, इसलिए सीडलिंग के समय केवल तभी दोबारा पानी दें, जब मीडियम की ऊपरी सतह पूरी तरह सूख जाए।
4. शुरुआती वेज | सप्ताह 2
ऑटोफ्लावर के सप्ताह-दर-सप्ताह विकास में, दूसरा सप्ताह जड़ों की बढ़त का समय होता है, ऊपर से पौधे में ज्यादा बदलाव नहीं दिखता। युवा पौधे को गर्म तापमान और हाई ह्यूमिडिटी पसंद आती है।
अब तक, आपको पौधे से लाइट की दूरी भी फिक्स करनी चाहिए। सीडलिंग को बहुत लंबा न होने दें ताकि वह कमजोर न दिखे। साथ ही, लाइट स्ट्रेस भी न आने दें।
| पौधे की ऊँचाई: | 3.5" (9 सेमी) | ह्यूमिडिटी: | 55% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 22" (56 सेमी) | प्रति दिन पानी: | 0.53 गैलन (2 लीटर) |
| दिन का तापमान: | 82°F (28°C) | pH: | 6.5 |
| रात का तापमान: | 70°F (21°C) | महक: | कोई नहीं |
पर्पल लेमोनेड ऑटो सीडलिंग ने वेज फेज का दूसरा सप्ताह अभी भी बोतल के निचले हिस्से से ढँका हुआ बिताया। ग्रोअर ने पहली बार यह तरीका आजमाया था। शायद आखिरी बार, क्योंकि उन्हें बहुत पसंद नहीं आया।
उन्हें लगा कि यह सीडलिंग पहले के चक्रों की तुलना में कुछ धीरे बढ़ रही थी, और जब उन्होंने आखिरकार बोतल हटा दी, तब विकास तेज दिखने लगा। ईमानदारी से कहें तो, सीडलिंग फिर भी बड़ी और मजबूत दिख रही थी।
वैसे, डायरी में यह असल में पहला सप्ताह दर्ज था, लेकिन हम सहमत नहीं थे। हमने डेट्स चेक कीं और लगा कि टाइमलाइन 2-4 दिन पीछे चल रही थी। वैसे भी, कोई 7 दिन का पौधा नीचे दी गई तस्वीर जैसा विकसित नहीं दिख सकता। ज़्यादा ठीक लगे तो 9 या 10-11 दिन कहिए।

5. मिड वेज | सप्ताह 3-4
महीने के दूसरे भाग में, स्वस्थ ऑटोफ्लावर्स तेजी से फैलते हैं, ज्यादा पत्तियाँ और साइड ब्रांचेज़ बनाते हैं, ताकि वेज फेज के बाद प्री-फ्लावरिंग शुरू होते ही अच्छी ग्रोथ मिले। इस समय अधिकतर इंडोर गार्डनर अपनी ऑटो को ट्रेन करते हैं ताकि वे चौड़ी और नीचे रहें।
कुछ लोग टॉपिंग का रिस्क भी लेते हैं, लेकिन आमतौर पर लो-स्ट्रेस ट्रेनिंग ही सेफ है। LST से सभी बड्स बराबर ऊँचाई पर रहते हैं, लाइट सबको बराबर मिलती है और हार्वेस्ट में छोटे 'पॉपकॉर्न' बड्स नहीं बनते।
| पौधे की ऊँचाई: | 3.5" (9 सेमी) | ह्यूमिडिटी: | 55% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 22" (56 सेमी) | प्रति दिन पानी: | 0.53 गैलन (2 लीटर) |
| दिन का तापमान: | 82°F (28°C) | pH: | 6.5 |
| रात का तापमान: | 66°F (19°C) | महक: | कोई नहीं |
याद है, पर्पल लेमोनेड ऑटो सीधे 20L पॉट में बोयी थी? यह ऑटो के लिए बेस्ट है क्यूँकि रीपॉटिंग से ट्रांसप्लांट का स्ट्रेस बचता है। लेकिन छोटी सीडलिंग का बड़ा पॉट में होना दूसरी समस्या - पानी देना।
ग्रोअर ने सीडलिंग के आस-पास धीरे-धीरे पानी देना शुरू किया और 14वें दिन तक वह पॉट के किनारे तक पहुँच गया। उस दिन पॉट को 4 लीटर फीडिंग सॉल्यूशन से भिगोया।
50% पर्लाइट के कारण उसे बार-बार पानी डालना पड़ा - हर दूसरे दिन। आमतौर पर मिट्टी में बड़े पॉट में उगा रहे हों तो शुरूआत में 3-4 दिन में एक बार ही पानी देना काफी है।
तीसरे सप्ताह की शुरुआत में मुख्य तना पहली बार बांधा गया और पांच दिन में साइड ब्रांचेज़ भी LST के लायक हो गईं।

बाद में, ग्रोअर को लगा कि ब्रांचेज जमीन के बहुत करीब पिन करने से वे 'घुट' रही थीं और यील्ड शायद कम हो गया।
पौधे को पत्तियां छांटने (डिफोलिएशन) की जरुरत भी पड़ी, जबकि पहले प्लान में नहीं था। कुछ पत्तियाँ मीट्टी में लगभग दब गई थीं, इसलिए उन्हें हटाना ही बेहतर था।
6. ट्रांजिशन (प्री-फ्लावर) | सप्ताह 5
कैनाबिस फ्लावरिंग चरणों की शुरुआत - जब पौधे सबसे ऊपर पिस्टिल्स दिखाते हैं और लंबाई में बढ़ते हैं - यही सही समय है जब पौधों की ट्रेनिंग ज्यादा कर सकते हैं और टॉप्स को बराबर ऊँचाई पर रख सकते हैं। हमारे गार्डनर ने भी यही किया, और काफी सलीके से।
| पौधे की ऊँचाई: | 3.5" (9 सेमी) | ह्यूमिडिटी: | 55% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 22" (56 सेमी) | प्रति दिन पानी: | 0.53 गैलन (2 लीटर) |
| दिन का तापमान: | 82°F (28°C) | pH: | 6.5 |
| रात का तापमान: | 66°F (19°C) | महक: | कोई नहीं |
गंभीर LST ट्रेनिंग के अलावा, ग्रोअर ने वे फैन लीव्स भी हटाईं, जो ज़्यादा लाइट नहीं ले रहीं थीं या नीचे के बड्स को शेड कर रही थीं। अब सब कुछ फ्लावरिंग स्ट्रेच के लिए तैयार था और हर टॉप पर पहले से पिस्टिल्स दिखने लगे थे।

7. शुरुआती फ्लावर | सप्ताह 6-7
जब आपके ऑटोफ्लावर में फ्लावरिंग शुरू होती है, सबसे पहले ब्रांचेज लंबी होती दिखती हैं, बड्स नहीं। इसे "फ्लावरिंग स्ट्रेच" कहते हैं और कई नए ग्रोअर हैरान रह जाते हैं। नीचे चार्ट से इसे और समझिए:

याद रखें कि फ्लावरिंग शुरू होते ही आपका ऑटो 50% से 300% तक स्ट्रेच कर सकता है। यह मुख्य रूप से जेनेटिक्स पर निर्भर करता है। थोड़ी ही देर में फूल बढ़ने लगते हैं और गंध भी आने लगती है। यदि अभी तक कार्बन फिल्टर नहीं लगाया है, तो अब लगा लें।
| पौधे की ऊँचाई: | 3.5–6" (9–15 सेमी) | ह्यूमिडिटी: | 55% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 22" (56 सेमी) | प्रति दिन पानी: | 0.53 गैलन (2 लीटर) |
| दिन का तापमान: | 79°F (26°C) | pH: | 6.5 |
| रात का तापमान: | 66↘64°F (19↘18°C) | महक: | हल्की |
यह पर्पल लेमोनेड छठवें और सातवें हफ्ते तक फैलती रही। हालांकि, वह लंबी नहीं हुई। फूल गहरे हो गए, पत्तियों पर भी पर्पल आ रहा था। और इसी दौरान ट्राइकोम्स बनने लगे।

इतनी कॉम्पैक्ट और सिमेट्रिकल थी कि कैनोपी मैनेजमेंट की जरुरत ही नहीं पड़ी - सिवाय कभी-कभी हल्की डिफोलिएशन के जब कुछ फैन लीव्स नीचे के फूलों को ढक रही थीं। असल ज़रूरत थी तो फीडिंग की।
पहली फीडिंग 9वें दिन मिली—ज्यादातर ग्रोअर इससे बहुत बाद में फीड शुरू करते हैं, खासकर इतना बड़ा मीडियम (20L) और मिट्टी में। फिर भी, यह पर्पल लेमोनेड ऑटो बहुत स्वस्थ और मजबूत रही। उसे यह सब (सिवाय एक के) Advanced Nutrients के प्रोडक्ट्स मिले:
- pH Perfect कॉम्बो (Grow, Micro & Bloom): सभी जरूरी मैक्रो-माइक्रो न्यूट्रिएंट्स के लिए; पूरी ग्रो स्टेज में बराबर इस्तेमाल,
- B-52 (समुंद्र शैवाल और केल्प एक्सट्रेक्ट, पोटैशियम से भरपूर); सीडलिंग और फ्लावरिंग में दोबारा,
- Voodoo Juice: फायदेमंद माइक्रोब्स, सीडलिंग और ट्रांजिशन के दौरान दो बार,
- Vitalink CalMag: कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन (विशेषत: कोको मीडियम के लिए),
- Rhino Skin: और हल्का पोटैशियम बूस्टर; मुख्य रूप से सिलिकॉन, जिससे सेल वॉल्स और ब्रांच मजबूत बनती हैं,
- Bud Candy: पूरे फ्लावरिंग समय के लिए, क्रैनबेरी और ग्रेप एक्सट्रेक्ट, सुखद स्वाद और गंध बढ़ाने के लिए,
- Big Bud: पोटैशियम और फॉस्फोरस, दोनों से फूल भारी और घने बनते हैं,
- Overdrive: फ्लावर के आखिरी हफ्तों में, समृद्ध P-K फॉर्मूला, थोड़ा सा नाइट्रोजन और मैग्नीशियम साथ में; बड्स की फॉर्मेशन को फाइनल पुश देता है।
पूरा न्यूट्रिएंट शेड्यूल देखें:

8. मध्य फ्लावर (बुल्क फेज) | सप्ताह 8-9
पर्पल लेमोनेड ऑटोफ्लावर सप्ताह-दर-सप्ताह समीक्षाओं में देखा गया कि इस समय तक ट्राइकोम्स काफी मेच्योर हो चुके हैं, लेकिन नए कालिक्स और सफेद पिस्टिल्स बनने बंद नहीं होते। तो अगर आपको अधिक यील्ड चाहिए तो हार्वेस्ट में जल्दबाजी न करें।
फ्लावरिंग के आखिरी फेज में रिलेटिव ह्यूमिडिटी कम करें ताकि फूलों को फफूंदी और बड रॉट से बचाया जा सके। साथ ही, दिन का तापमान थोड़ा घटा सकें तो THC और टरपीन का उत्पादन अच्छा होगा। पर्पल स्ट्रेनों में कलर और निखर आता है।
| पौधे की ऊँचाई: | 12" (30 सेमी) | ह्यूमिडिटी: | 50% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 18" (46 सेमी) | प्रति दिन पानी: | 0.53 गैलन (2 लीटर) |
| दिन का तापमान: | 82°F (28°C) | pH: | 6.5 |
| रात का तापमान: | 64°F (18°C) | महक: | नॉर्मल↗तेज |
सप्ताह 8 और 9 में लग रहा था यह पर्पल लेमोनेड ऑटो लाइफ साइकिल खत्म करने वाली है। गार्डनर ने Big Bud की जगह Overdrive दे दी, मजबूत फिनिश के लिए।
बड्स दिन-रात भारी और घने होते जा रहे थे। ट्राइकोम्स लगभग मिल्की होकर, बस 50% पिस्टिल्स ही एम्बर हुए थे। इससे फिर साफ होता है कि हार्वेस्ट का सही वक्त पिस्टिल्स नहीं बल्कि ट्राइकोम्स देखकर तय करें।

आखिरी हफ्ते में ग्रोअर ने pHd पानी से फ्लश किया जाकर एक समस्या दूर की। कुछ पत्तियाँ धब्बेदार हो गई थीं और सूखने लगी थीं, उन्हें लगा कि CalMag ज्यादा हो गया है। वैसे ऐसे लक्षण आमतौर पर कैल्शियम की कमी को दिखाते हैं।
वैसे समस्या आगे नहीं बढ़ी, और वैसे भी पूरी सीड-टू-हार्वेस्ट साइकिल करीब-करीब खत्म ही थी। दिन 61 को पर्पल लेमोनेड ऑटो को दूसरे आखिरी बार फ्लश किया।
फ्लश करने का मकसद जमा हुए खरापन (सॉल्ट्स) को बाहर निकालना है - न सिर्फ मीडियम से बल्कि पौधे के ऊतकों से भी। शुद्ध, स्मूद स्वाद चाहिए तो यह ज़रूर करें।
9. पकना और हार्वेस्ट | सप्ताह 10
पर्पल लेमोनेड ऑटो एक बहुत तेज़-फ्लावरिंग किस्म लगती है, क्योंकि सभी रिपोर्ट्स में वह 10-11 सप्ताह में पूरी तरह तैयार हो जाती है। और इस ग्रो में तो 10वें सप्ताह के पहले ही काट ली गई थी, तो आखिरी फ्लश प्लान करते समय इसका ध्यान रखें।
| पौधे की ऊँचाई: | 12" (30 सेमी) | ह्यूमिडिटी: | 40% |
|---|---|---|---|
| लाइट से दूरी: | 18" (46 सेमी) | प्रति दिन पानी: | 0.53 गैलन (2 लीटर) |
| दिन का तापमान: | 79°F (26°C) | pH: | 6.5 |
| रात का तापमान: | 64°F (18°C) | महक: | तेज |
यह कॉम्पैक्ट और बेहद तेज पर्पल लेमोनेड ऑटो पूरा फ्लश नहीं हो सकी - बस दो बार; क्योंकि ग्रोअर को उम्मीद नहीं थी कि वह इतनी जल्दी पक जाएगी।
उसने उसे बस 61 और 64 दिन पर फ्लश किया, तभी तक ट्राइकोम्स एम्बर होना शुरू हो गए थे। कुछ और फैन लीव्स जो बीच में लाइट रोक रहीं थीं, उन्हें भी निकाल दिया गया और पौधे को काटने से पहले दो दिन तक सूखने दिया।

10. यील्ड और स्मोक रिपोर्ट
ग्रोअर ने हार्वेस्ट किया 68वें दिन (करीब 5-10% एम्बर ट्राइकोम्स के साथ)। नीचे के बड्स थोड़ा कम पके थे, और वजन और बढ़ सकता था, लेकिन ग्रोअर ने एक ही बार में हार्वेस्ट किया। फाइनल यील्ड रही 68.5 ग्राम (2.42 औंस) सूखी।

ग्रोअर ने अच्छा से सुखी, डंठल से नीचे वाला एक छोटा सा बड टेस्ट किया था (और वह भी सिर्फ कुछ दिनों की ड्राइंग के बाद)। तो यह पर्पल लेमोनेड ऑटो अपने शिखर पर नहीं थी, फिर भी ग्राइंड की हुई बड्स से कुकीज, सिट्रस और फ्यूल जैसी तेज गंध आई, स्मूक स्मूद था, स्वाद में खट्टापन और अच्छा दिमागी हाई, जो बाद में गहरे लेकिन फोकस्ड स्टोन में बदल गया। रात को पीने के लिए एकदम सही।
11. निष्कर्ष
पर्पल स्ट्रेन्स सभी की पसंद हैं और पर्पल लेमोनेड ऑटो भी कोई अपवाद नहीं है। यह औसत पर्पल किस्मों से भी बेहतर है: बड्स अधिक घने, ग्रोथ पैटर्न, आकार और यील्ड ज्यादा स्थिर।
बड्स की बैग अपील बहुत जबरदस्त है और उनमें नींबू की अदभुत खुशबू है। उनका धुआँ किसी भी मानकों पर शक्तिशाली है (22% THC के कारण)। काफी Indica के बावजूद, यह आपको सोफे से चिपकाता नहीं है, बल्कि आराम देकर काम करने को प्रेरित करता है।
सीड से हार्वेस्ट की यात्रा छोटी और आसान है। कई कालिक्स अभी 8 सप्ताह में पी जाने लायक हो जाती हैं, पर नई-नई बनती रहती हैं। जल्दी न करें, कुछ और हफ्ते रुक जाएँ तो ज्यादा और अच्छा यील्ड मिलेगा, खासकर अगर जंबो फीनो मिल जाए तो।
ज्यादातर पौधे छोटे-कॉम्पैक्ट रहते हैं, लेकिन ट्रेनिंग के बिना भी ब्रांचेज़ खूब बनती हैं। ट्रेनिंग—चाहे LST या HST—इनकी गति नहीं रोकती, न ही फाइनल नतीजों पर नेगेटिव असर डालती है।
संक्षिप्त में कहें तो, पर्पल लेमोनेड ऑटो शीर्ष गुणवत्ता की फसल कम समय में पाने का सीधा रास्ता है। सभी को शुभकामनाएँ!
बाहरी संदर्भ
- औद्योगिक भांग (Cannabis sativa L.) की जैव-चिकित्सा उपयोग के लिए उपयुक्त कृषि पद्धतियों पर शोध, I.F.García-Tejero et al., जुलाई 2019
- 11 देशों में घरेलू कैनाबिस खेती: नमूना आंकड़े और उगाने के तरीके, Gary R Potter et al., दिसम्बर 2014
- खेती के सेटिंग का इन्फ्लोरेसेंस लिपिड डिस्ट्रीब्यूशन, सांद्रता और कार्बन आइसोटोप रेशियो पर प्रभाव, Forensic Science International, मार्च 2016
- कैनाबिस सतीवा ‘Finola’ में PGPR: फर्टिलाइजेशन का विकल्प और गुणवत्ता विशेषताएँ, G. Pagnani, M. Pellegrini et al., Industrial Crops and Products, नवम्बर 2018
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