अपने ऑटोफ्लावर कैनाबिस का यील्ड बढ़ाने के 5 सबसे बेहतरीन तरीके
- 1. बड़ा गमला लें
- 2. उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी का उपयोग करें
- 3. न्यूट्रिशन
- 4. हाइड्रोपोनिक्स का उपयोग करें
- 5. ज़्यादा प्रकाश का उपयोग करें
- 6. ट्रेनिंग (सिर्फ प्रो के लिए)
मैं इतना बड़ा पौधा कैसे उगा सकता हूँ? बहुत सारे ग्रोअर्स हमारी सोशल मीडिया पर तस्वीरें देखकर ऑटोफ्लावर के आकार और यील्ड से हैरान रह जाते हैं। वो ऐसा कैसे करते हैं? खैर, हम यहाँ पाँच आसान बातें साझा करने आए हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी अगली फसल को जबरदस्त बना सकते हैं। जब आप यहाँ हैं तो ऑटोफ्लावर की सबसे ज्यादा यील्ड देने वाली टॉप 5 स्ट्रेन भी देखना न भूलें।
1. बड़ा गमला लें
पौधे का ऊपर वाला भाग जितना बड़ा होता है, उसकी जड़ें उतनी ही बड़ी और गहरी होती हैं। कैनाबिस का रूट सिस्टम उसकी सेहत और आपके यील्ड के लिए उतना ही जरूरी है जितना आपको ऊपर दिखने वाला हरा-भरा पौधा।

इस सिस्टम को जितनी जगह मिलेगी, पौधा उतना बड़ा होगा। इसलिए यील्ड बढ़ाने की सबसे आसान ट्रिक है - जितना बड़ा गमला इस्तेमाल कर सकते हों, करें। अगर आप इंडोर ग्रोअर हैं और आपके ग्रो टेंट की ऊँचाई सीमित है, तो आपको थोड़े छोटे गमले का चुनाव करना होगा। बहुत बड़ा गमला लेने पर पौधा टेंट की सीमाएं पार कर सकता है।
2. उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी का उपयोग करें
कैनाबिस का बीज एक ऐसी मशीन है जो मिट्टी को गांजे में बदल देता है। उसके गमले में डालने वाली मिट्टी की गुणवत्ता प्रत्यक्ष रूप से आपके पौधे की सेहत और अंतिम तौर पर आपकी फसल के आकार पर असर डालती है। केवल अपने लोकल स्टोर से कोई भी मिट्टी उठाकर न ले आएं। अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी उच्च गुणवत्ता वाली घास के लिए जरूरी है, इसलिए इसे सावधानी से चुनें।

शुरुआती लोगों के लिए, अपनी पसंद की उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी को कोको कोयर के साथ 50/50 मिक्स करना अच्छी शुरुआत होगी। अनुभवी ग्रोअर चाहें तो दूसरी ग्रोइंग मीडियम्स भी आजमा सकते हैं।
3. न्यूट्रिशन
अच्छी मिट्टी जरूरी है, लेकिन कभी-कभी ये काफी नहीं होती। आपके पौधों को उनकी वृद्धि के दौरान विशेष पोषक तत्वों की जरूरत होती है ताकि वो अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुँच सकें। हो सकता है थोड़ी सावधानी या किस्मत से आपकी मिट्टी में हर जरूरी तत्व मौजूद हो, मगर ज्यादातर मामलों में अतिरिक्त पोषक तत्व देना पड़ता है।

ऐसे में हम सलाह देंगे कि उच्च गुणवत्ता वाले पौधों के न्यूट्रिएंट्स में निवेश करें। हम किसी ब्रांड की सिफारिश तो नहीं कर सकते, लेकिन बता सकते हैं कि ऑटोफ्लावर पौधे बहुत भूखे होते हैं, और अक्सर न्यूट्रिएंट डिफिशिएंसी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी देखने को मिलती है।
4. हाइड्रोपोनिक्स का उपयोग करें
यील्ड बढ़ाने के सबसे आसान और असरदार तरीकों में से एक है - मिट्टी को छोड़कर पूरी तरह हाइड्रो विधि अपनाएं। हाइड्रोपोनिक्स में कई फायदे हैं, लेकिन अगर आपके लिए सबसे बड़ा यील्ड पाना ही सर्वोच्च है तो इससे बेहतर कोई तरीका नहीं है जिससे आपको हर ग्रो में सबसे बड़ी, जूसी कली मिले। हाइड्रोपोनिक ग्रोइंग से सबसे ज्यादा यील्ड की गारंटी मिलती है क्योंकि इसमें कुछ अहम प्रक्रियाएं होती हैं। इसमें मिट्टी निकालकर जड़ों को सीधे पोषक-घोल में उगाते हैं और पूरे न्यूट्रिशनल इंटेक पर पूरा कंट्रोल होता है।
इससे आप पौधों को हर जरूरी पोषक तत्व के सटीक स्तर और जरूरत के हिसाब से तेज़ी से उपलब्ध करा सकते हैं, जिससे उनकी ग्रोथ बढ़े और यील्ड बड़ी हो। साथ ही, आप pH रेंज को भी पूरी तरह नियंत्रित करते हैं, जिससे न्यूट्रिएंट लॉकआउट या अन्य समस्याओं का खतरा खत्म हो जाता है।
इसके अलावा, हाइड्रो सिस्टम में जड़ क्षेत्र में ऑक्सीजन ज़्यादा मिलता है बनिस्बत शुद्ध मिट्टी विकल्प के। इससे ग्रोथ रेट और उत्साह दोनों तेज हो जाते हैं, जो सीधे बड़ी यील्ड से जुड़े हैं। आप ऑटोमेटेड सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे आपका पौधा हमेशा आदर्श मात्रा में न्यूट्रिएंट्स ले, और आपको बार-बार देखभाल की चिंता भी कम होगी।
तो अगर बड़ी यील्ड का सपना है, तो मिट्टी को छोड़ें और हाइड्रोपोनिक सिस्टम अपनाने पर विचार करें। ऑर्गेनिक ग्रोम में शायद ज़्यादा समृद्ध टेर्पीन स्वाद हो सकता है, लेकिन अगर शुद्ध यील्ड पोटेंशियल देखें तो हाइड्रो से बेहतर कुछ नहीं।
5. ज़्यादा प्रकाश का उपयोग करें
ऑटोफ्लावर चाहे जिस भी लाइट शेड्यूल में रहें, फिर भी वे फूल देंगे, तो उन्हें रोशनी देने में कंजूसी मत करें। ग्रोअर अक्सर 20 घंटे रोशनी और 4 घंटे अंधेरे का शेड्यूल अपनाते हैं, जिससे शानदार नतीजे मिलते हैं।

कुछ जोशीले ग्रोअर तो 24 घंटे की भी लाइटिंग करते हैं। लाइट, यही तो पौधे को चाहिए। तो रोशनी देने में कंजूसी मत करें!
6. ट्रेनिंग (सिर्फ प्रो के लिए)
अनुभवी ग्रोअर अपनी फसल का आकार बढ़ाने के लिए पौधों की ट्रेनिंग कर सकते हैं। कैसे ट्रेन करें? तरीका ट्रेनिंग पर निर्भर करता है। सबसे लोकप्रिय तरीका 'टॉपिंग' है - इसमें पौधे के ऊपर का छोटा हिस्सा काटते हैं ताकि नीचे की शाखाओं में भी ग्रोथ हो। इससे पौधा छोटा लेकिन कई बड़ी कलियों वाला बन जाता है, जिनपर ग्रो लाइट की रोशनी पड़े। इसके अलावा - फिमिंग (कम आक्रामक टॉपिंग), डिफोलिएशन (पत्तियों को हटाकर न्यूट्रिएंट्स को फूलों तक पहुँचाना) और टाई-डाउन (युवा पौधे को स्टेक्स से जमीन पर बांधकर मजबूर करना कि वह क्षैतिज बढ़े) विधियाँ लोकप्रिय हैं।
ग्रोअर इनमें से कोई भी या सभी तकनीकों की मिलावट कर सकते हैं, पर ध्यान रहे, इसमें रिस्क भी है। अनाड़ी ग्रोअर अक्सर बहुत आक्रामक ट्रेनिंग कर देते हैं। पारंपरिक फोटोपिरियड कैनाबिस में, पौधा रिकवर करके जितना चाहें उतना समय वेज कर सकता है, मगर ऑटोफ्लावर अपने-आप फूलना शुरू कर देता है, इसलिए ट्रेनिंग के दौरान लगी चोट पूरी तरह ठीक न हो पाने पर यील्ड प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से, Fast Buds की ऑफिसियल सलाह यह है कि ऑटोफ्लावर पर HST (हाई-स्ट्रेस ट्रेनिंग) न करें, लेकिन ग्रोअर तो विद्रोही होते हैं और अक्सर कर भी लेते हैं। फिमिंग और टॉपिंग दोनों HST के प्रकार हैं - यानी वो ट्रेनिंग जिसमें पौधे को चोट पहुँचती है इस उम्मीद में कि पौधा बेहतर रिजल्ट देगा। एक और तरीका है - LST (लो-स्ट्रेस ट्रेनिंग), जिसमें बिना नुकसान पहुँचाए पौधे को झुकाकर और बांधकर साइड-विकास को बढ़ावा देते हैं।
LST में पौधे को धीरे से झुकाकर बांध देते हैं ताकि उसकी छतरी समतल रहे। बाँधने के लिए आप टवाइन इस्तेमाल कर सकते हैं, मगर कोशिश करें कि लोकल गार्डन सेंटर से सॉफ्ट गार्डनिंग टाई लें, जिससे तना या शाखा टूटने का खतरा कम हो। टाई-डाउन मेथड पौधे को ऐसा महसूस कराती है जैसे मुख्य कोला कट गया हो और पौधा अपना ग्रोथ हार्मोन और न्यूट्रिएंट्स सभी कलियों को बराबर पहुँचाता है बजाय केवल मुख्य कोला पर फोकस करने के। यह तरीका (सही ढंग से, सावधानी से किया जाए तो) पौधे को नुकसान नहीं पहुँचाता, और HST जैसी ग्रोथ पर असर भी नहीं डालता। टाई-डाउन को SCROG टेक्निक के साथ मिलाकर अधिकतम यील्ड और पोटेंसी पाई जा सकती है।
ये पांचों ट्रिक हमारे पूरे स्ट्रेन कैटलॉग पर लागू होती हैं। तो फिर इंतजार किस बात का? लिंक पर क्लिक करें और Fast Buds के साथ ग्रोइंग का मजा लें!
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