मॉन्स्टर क्रॉपिंग के लिए सम्पूर्ण गाइड
- 1. मॉन्स्टर क्रॉपिंग क्या है?
- 2. क्या मॉन्स्टर क्रॉपिंग काम करता है और इसमें कितना समय लगता है?
- 3. मॉन्स्टर क्रॉपिंग के फायदे
- 4. मॉन्स्टर क्रॉपिंग के नुकसान
- 5. मॉन्स्टर क्रॉपिंग से मेरी उपज कितनी बढ़ेगी?
- 6. मॉन्स्टर क्रॉपिंग कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
- 6. a. स्टेप 1: कटिंग्स चुनें
- 6. b. स्टेप 2: क्लोन्स के रूट होने का इंतजार करें
- 6. c. स्टेप 3: क्लोन को री-वेजिटेट करना
- 6. d. मॉन्स्टर क्रॉपिंग आउटडोर
- 7. मॉन्स्टर क्रॉपिंग को अन्य तकनीकों के साथ मिलाना
- 8. निष्कर्ष
मॉन्स्टर क्रॉपिंग गांजा बीज एक अपेक्षाकृत नई विधि है जिससे आप अपनी उपज बढ़ा सकते हैं। इस तकनीक में फ्लावरिंग पौधे से कटिंग लेकर उन्हें फिर से वेजिटेट किया जाता है, जब आप गांजा पौधे को फिर से वेजिटेट करते हैं, तो इसमें असामान्य वृद्धि देखने को मिलती है, यह पौधा बहुत ही झाड़ीदार हो जाता है और इसमें कई साइड ब्रांचेज़ और फ्लावरिंग साइट्स बन जाती हैं।
1. मॉन्स्टर क्रॉपिंग क्या है?
तो, मॉन्स्टर क्रॉपिंग क्या है? मॉन्स्टर क्रॉपिंग गांजा उत्पादकों के लिए काफ़ी नई तकनीक है। इस विधि में एक मादा पौधे से उसके फ्लावरिंग स्टेज (2-4 हफ्ते में) के दौरान क्लोन लिए जाते हैं और उन्हें वेजिटेटिव लाइट साइकल में रखा जाता है। ऐसा करने से पौधे की वृद्धि बाधित होती है और वह असामान्य रूप से झाड़ीदार बन जाती है।
जब गांजा पौधे को फिर से वेजिटेट किया जाता है तो इसकी वृद्धि का पैटर्न असामान्य हो जाता है, जिससे अधिक फ्लावरिंग साइट्स, साइड ब्रांचेज़ और पत्तियां बनती हैं। इसे उत्पादक उपज बढ़ाने या स्क्रॉग (Scrog) या लॉलीपॉपिंग जैसी ट्रेनिंग तकनीकों के लिए पौधों को बेहतर रूप से तैयार करने के लिए किया जाता है।
ध्यान रखें कि मॉन्स्टर क्रॉपिंग ऑटोफ्लावरिंग गांजा पौधों के लिए नहीं है। यह तकनीक केवल फोटोपीरियडिक गांजा के लिए है और अगर सही तरीके से की जाए, तो आप न सिर्फ उपज बढ़ा सकते हैं बल्कि अपने अगले चक्र के वेजिटेटिव स्टेज का समय भी घटा सकते हैं। साथ ही, अपनी पसंदीदा जेनेटिक को अपने ग्रो रूम में जब तक चाहें तब तक रख सकते हैं।
2. क्या मॉन्स्टर क्रॉपिंग काम करता है और इसमें कितना समय लगता है?
मॉन्स्टर क्रॉपिंग गांजा वास्तव में काम करता है, और बहुत ही शानदार तरीके से करता है, हालांकि यह कहना मुश्किल है कि कितने समय में, क्योंकि हर पौधे की वृद्धि दर अलग होती है। उदाहरण के लिए, अगर आपने अपने पौधे को 4 हफ्ते वेजिटेट किया है, तो 4 हफ्ते + 2-3 हफ्ते फ्लावरिंग + 2-3 हफ्ते कटिंग के रूट होने में मिलेंगे।

वैसे इसमें समय जरूर लग सकता है लेकिन परिणाम से आप संतुष्ट रहेंगे, आप देखेंगे कि कुछ हफ्ते और इंतजार करना उपज को बहुत बढ़ा सकता है।
3. मॉन्स्टर क्रॉपिंग के फायदे
- मॉन्स्टर क्रॉपिंग उपज बढ़ाता है
फिर से वेजिटेट किए गए पौधे अधिक बड़े, अधिक झाड़ीदार और अधिक साइड ब्रांचेज़ के साथ उगते हैं, जिससे अधिक फ्लावरिंग साइट्स और परिणामस्वरूप अधिक कली मिलती है। क्यों? क्योंकि अधिक झाड़ीदार पौधों में अधिक शाखाएँ होती हैं, अधिक शाखाएँ मतलब अधिक नोड्स। अगर आप नहीं जानते, नोड्स वो जगह होती हैं जहाँ शाखाएँ मुख्य तने से मिलती हैं। इन्हीं जगहों से फूल निकलना शुरू होते हैं जब आप फोटोपीरियड पौधे को वेजिटेटिव लाइट साइकल से फ्लावरिंग लाइट साइकल में बदलते हैं। थोड़े ही समय में, इन पॉइंट्स से प्रीफ्लावर्स के संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं। कुछ ही हफ्तों में ये छोटी संरचनाएँ बड़ी इन्फ्लोरेसेंस बन जाएंगी जो ट्राइकोम्स, कैनाबिनॉयड्स, टेर्पेन्स और चिपचिपे रेजिन से भरपूर होंगी।
- मदर पौधे को बनाए बिना लगातार हार्वेस्ट
क्योंकि आप फ्लावरिंग पौधों से कटिंग ले रहे हैं, मदर पौधे को वेजिटेटिव स्टेज में रखने की जरूरत नहीं है। आप सभी पौधों को फ्लावरिंग में ले जा सकते हैं और तय कर सकते हैं कि फ्लावरिंग की पहले हफ्तों में कटिंग लेना है या नहीं। इससे मॉन्स्टर क्रॉपिंग सीमित जगह वाले उत्पादकों के लिए आदर्श बन जाती है। अलग-अलग लाइट, टेंट या स्पेस वेजिटेटिंग मदर पौधे को समर्पित करने की जगह, आप सीधा फ्लावरिंग स्टेज में मौजूद पौधों से क्लोनिंग कर सकते हैं। एक बार हार्वेस्ट और सफाई के बाद, आप कटिंग को दोबारा वेजिटेट कर सकते हैं। इसका मतलब आप मुख्य साइकिल के मुकाबले ग्रोइंग साइकिल में काफी आगे से शुरू करेंगे। इसके अलावा, यह तकनीक वेजिटेटिंग मदर पौधे से काटी गई कटिंग की तुलना में ज्यादा झाड़ीदार और उत्पादक पौधा बनाती है।
- अन्य ट्रेनिंग तकनीकों के लिए पौधा तैयार करने का बढ़िया तरीका
मॉन्स्टर क्रॉपिंग को स्क्रॉग, शाखाएं बांधना या फिर टॉपिंग और फिमिंग जैसी प्लांट ट्रेनिंग तकनीकों के साथ मिलाकर करने की सलाह दी जाती है, इससे कलियाँ सही से विकसित होंगी और बहुत घनी हो जाएँगी।
4. मॉन्स्टर क्रॉपिंग के नुकसान
- मॉन्स्टर क्रॉपिंग में समय और मेहनत लगती है
पौधे को फ्लावरिंग में ले जाना, क्लोनिंग करना और उन्हें फिर से वेजिटेट होने का इंतजार करना काफ़ी समय लग सकता है, इसलिए अगर आपको त्वरित हार्वेस्ट चाहिए तो यह सलाह नहीं दी जाती। आपको कटिंग की देखभाल का भी थोड़ा ज्ञान होना चाहिए - इसमें उन्हें रूट कराना और बीमारियों से बचाव करना शामिल है। दुर्भाग्यवश, यह सिर्फ शाखा काटने और उसे भूल जाने जितना आसान नहीं है। अगर आप इसे सरल रखना चाहते हैं तो बीज से अगली फसल शुरू करना अधिक आसन रहेगा।
- ऑटोफ्लावरिंग पौधों पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता
क्योंकि ऑटोफ्लावरिंग पौधे लाइट साइकल पर निर्भर नहीं करते, वे दोबारा वेजिटेट नहीं हो सकते, इस तकनीक का उपयोग ऑटोफ्लावरिंग स्ट्रेन्स के लिए नहीं किया जा सकता।
- हर क्लोन जीवित नहीं रहेगा
फ्लावरिंग क्लोन्स का सफलता दर कम होता है, जबकि वेजिटेटिव पौधों से क्लोनिंग में ज्यादा सफलता मिलती है इसलिए कुछ कटिंग का रूट न होना या मरना आम है। बेहतरीन क्लोनिंग तकनीक अपनाएं और कुछ अतिरिक्त क्लोन भी लें ताकि अगर कुछ बच न पाए तो रिप्लेसमेंट रहे।
नोट: हम छोटे स्ट्रेनों पर मॉन्स्टर क्रॉपिंग की सलाह नहीं देते, यह तकनीक लंबी, तेज़ बढ़ने वाली और ज्यादा साइड ब्रांचेज़ वाली स्ट्रेनों के लिए बेहतर है। छोटे पौधों या ऐसी स्ट्रेनों में, जिनकी वृद्धि धीमी है, बीज को अंकुरित करने की तुलना में दोबारा वेजिटेट करने में अधिक समय लग सकता है।
5. मॉन्स्टर क्रॉपिंग से मेरी उपज कितनी बढ़ेगी?
यह कहना थोड़ा मुश्किल है कि मॉन्स्टर क्रॉपिंग से गांजा की उपज कितनी बढ़ेगी, क्योंकि ये तापमान, नमी, पोषक तत्व, स्ट्रेन और आपके उत्पादक अनुभव जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि उपज इस बात पर निर्भर करती है कि आपने पौधे को कितना समय वेजिटेट होने दिया - जितना बड़ा पौधा, उतनी ही अधिक उपज।
लेकिन, सामान्यतः आपको इतनी ही उपज की उम्मीद करनी चाहिए जितनी मदर पौधे में थी, क्योंकि नया पौधा असल में एक क्लोन है। अगर आप क्लोन को उसी वातावरण में और उतने ही समय वेजिटेट करवाते हैं जितना मदर को, तो उपज बराबर होगी। ध्यान रखें कि मॉन्स्टर क्रॉपिंग से आप कई बार हार्वेस्ट कर सकते हैं तो अगर एक बार उपज आपकी उम्मीद पर नहीं उतरी, फिर भी आप एक ही स्ट्रेन को कई बार बढ़ा सकते हैं।
6. मॉन्स्टर क्रॉपिंग कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
स्टेप 1: कटिंग्स चुनें
आप फ्लावरिंग के 2-4 हफ्ते के बीच क्लोन ले सकते हैं, हालांकि परिणाम पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, हम सलाह देते हैं कि क्लोन तीसरे हफ्ते में लें।
शाखा चुनते समय आप पौधे के किसी भी हिस्से से कटिंग ले सकते हैं मगर नीचे वाली शाखाएं बेहतर होती हैं क्योंकि ये ऊपर की तुलना में जल्दी रूट होती हैं। क्लोन काटते समय तिरछा कट लगाएं (यह पोषक तत्व और पानी सोखने की सतह को बढ़ा देगा) - नोड से लगभग 0.5 सेमी नीचे। याद रखें कि फ्लावरिंग क्लोन्स का सफलता दर कम होता है, इसलिए कुछ अतिरिक्त कटिंग भी लें। अगर आपको 3 क्लोन चाहिए, तो 5-6 कटिंग लें ताकि सुनिश्चित हो सके।
स्टेप 2: क्लोन्स के रूट होने का इंतजार करें
कटिंग लेने के तुरंत बाद इन्हें पानी में रखें, आप रूटिंग हॉर्मोन भी लगा सकते हैं ताकि आपके क्लोन के बचने की संभावना बढ़ जाए। याद रखें, अगर वेस्कुलर सिस्टम में हवा चली गई तो पौधा मर सकता है, इसलिए रूटिंग हॉर्मोन लगाकर जल्दी से इसे पानी में डाल दें।

आपको क्लोन्स को पानी में ही कुछ समय छोड़ना चाहिए और सिर्फ तब ही ट्रांसप्लांट करना चाहिए जब जड़ विकसित हो जाए।
स्टेप 3: क्लोन को री-वेजिटेट करना
जब पौधे ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हों तो 18/6 वेजिटेटिव लाइट साइकल देना चाहिए, और संभव हो तो 20/4 लाइट साइकल दें जिससे क्लोन्स ज्यादा लाइट सोखेंगे, इससे ज्यादा ऊर्जा मिलेगी और रूटिंग तेज होगी; शुरुआती दौर में ज्यादा लाइट इंटेंसिटी देने की आवश्यकता नहीं है, क्लोन्स को जीवित रहने के लिए बहुत कम लाइट चाहिए। ध्यान रखें कि पौधों पर ज्यादा स्ट्रेस न आए, क्योंकि यह प्रक्रिया पहले ही थोड़ी कड़ी है, ज्यादा जोर डालने से वृद्धि और धीमी हो सकती है या पूरी तरह से रुक सकती है।

नोट: अगर आप पैसा बचाना चाहते हैं तो गांजा उगाने और फ्लावरिंग के लिए इस्तेमाल में आने वाली लाइट की बजाय सीएफएल (CFLs) का उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि क्लोन्स को बहुत ज्यादा प्रकाश की जरूरत नहीं है, बस जब वे थोड़े बड़े हो जाएं तो लाइट बदल लें।
मॉन्स्टर क्रॉपिंग आउटडोर
मॉन्स्टर क्रॉपिंग गांजा उनके लिए एकदम सही है जो बाहर (outdoor) उगाते हैं, लेकिन तभी जब आप गर्म और धूप वाले इलाके में रहते हैं, जहाँ बाहरी सीजन लंबा होता है, इससे आप साल में दो बार हार्वेस्ट कर सकते हैं अगर सही से योजना बनाएं। यह इसलिए क्योंकि आप फोटोपीरियडिक गुणों का उपयोग कर रहे हैं जो लंबी रातों में फूल लगाते हैं और छोटी रातों में वेजिटेट करते हैं।
इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए आपको सर्दियों में फोटोपीरियडिक बीज लगाने होंगे, जिससे पौधे तुरंत फ्लावरिंग शुरू कर देंगे 12/12 लाइट साइकल के कारण; ध्यान रखें कि मॉन्स्टर क्रॉपिंग ऑटोफ्लावर्स पर नहीं की जा सकती क्योंकि वे लाइट साइकल पर निर्भर नहीं करते, इस वजह से इस तकनीक को ऑटोफ्लावर्स पर लागू नहीं किया जा सकता।

आउटडोर मॉन्स्टर क्रॉपिंग में, अगर आप नहीं चाहते कि पौधे तुरंत फूल लगाएं, तो रात में रोशनी देकर उन्हें ज्यादा लंबा बढ़ने दें, इससे वे 12/12 साइकल में नहीं आएंगे और वेजिटेट होते रहेंगे। ध्यान रखें कि वे बहुत ज्यादा न बढ़ जाएं, क्योंकि उन्हें वसंत के अंत तक हार्वेस्ट के लिए तैयार होना चाहिए। अगर आप उन्हें बहुत अधिक समय वेजिटेट करते हैं, तो गर्मियों में पौधे और अधिक देर तक वेजिटेट होते रहेंगे। वसंत में जब दिन लंबे होने लगेंगे, तो आप पौधे की फूलने वाली शाखा से कुछ क्लोन्स ले सकते हैं, उन्हें दोबारा वेजिटेट करा सकते हैं और फिर मदर पौधे को हार्वेस्ट कर सकते हैं। रेवेगिंग प्राकृतिक या कृत्रिम (artificial) प्रकाश के तहत किया जा सकता है, बस क्लोन्स को 18/6 लाइट साइकल के अंतर्गत रखें।
जब तक आपके क्लोन्स रूटेड हो जाएं और वेजिटेटिंग शुरू कर दें, तब तक लाइट साइकल फिर से 18/6 हो जाएगा और वे सही से बढ़ेंगे, फिर फ्लावरिंग स्टेज गर्मियों के अंत में शुरू होगा जब लाइट साइकल 12/12 होगा और वह पतझड़ के साथ समाप्त होगा - यानी आपका दूसरा हार्वेस्ट। जैसा कि आपने देखा, आउटडोर मॉन्स्टर क्रॉपिंग में योजना बनाना और टाइमिंग बहुत जरूरी है, लेकिन कुछ अभ्यास से आप जरूर सफल होंगे!
मॉन्स्टर क्रॉपिंग के लिए बेस्ट स्ट्रेन कैसे चुनें?
कुछ स्ट्रेन्स आउटडोर मॉन्स्टर क्रॉपिंग के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं, हालांकि आप जो चाहें वो उगा सकते हैं लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखें ताकि यह तकनीक सफल रहे।
सबसे पहले, ध्यान रखें कि यह ऑटोफ्लावर्स के साथ, चाहे आउटडोर हो या इंडोर, नहीं किया जा सकता। आप ऑटोफ्लावर्स के साथ साल में दो या ज्यादा हार्वेस्ट पा सकते हैं लेकिन मॉन्स्टर क्रॉपिंग विधि के जरिए नहीं। ऑटोफ्लावर्स लाइट साइकिल पर निर्भर नहीं करते इसलिए आप उन्हें सालभर उगा सकते हैं।

तो, आउटडोर गांजा मॉन्स्टर क्रॉपिंग के लिए ऐसी स्ट्रेन चुनें जो कम समय में फूल दे, लगभग 8-10 हफ्ते। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपके पौधे सही समय पर हार्वेस्ट के लिए तैयार हों।
साथ ही, जो स्ट्रेन्स कम समय में फूल देते हैं वे दिन की लम्बाई के बढ़ने से कम प्रभावित होती हैं, इसलिए Indica-डोमिनेंट स्ट्रेन्स को चुनना बेहतर रहता है, क्योंकि Sativa जेनेटिक्स, कुछ मामलों में, थोड़ी ज्यादा रोशनी मिलने पर भी फिर से वेजिटेट करने लग सकते हैं। लेकिन चिंता न करें, इसकी गारंटी के लिए आप लाइट डेप्रिवेशन तकनीक इस्तेमाल कर सकते हैं।
7. मॉन्स्टर क्रॉपिंग को अन्य तकनीकों के साथ मिलाना
जैसा ऊपर बताया, जब आप पौधों को दोबारा वेजिटेट करते हैं, उनमें पत्तियों, शाखाओं और फ्लावरिंग साइट्स की असामान्य वृद्धि देखने को मिलती है, यह खासतौर पर तब मदद करता है जब आप हर पौधे का अधिकतम लाभ लेना चाहते हैं या ट्रेनिंग के जरिए Scrog ट्रेलिस को भरना चाहते हैं या अन्य ट्रेनिंग विधियाँ आज़माना चाहते हैं।

मॉन्स्टर क्रॉपिंग के बाद, जब आपका पौधा अच्छा आकार ले ले, तब आप शाखाओं को बांधना शुरू कर सकते हैं। इसे ट्रेलिस जाल के नीचे ट्रेन करें या टॉप करें ताकि मनचाहा परिणाम मिले। क्योंकि आपके पास ज्यादा पौधा है, यह प्रक्रिया आसान होगी और आप सिर्फ एक ही पौधे से अनेक कलियाँ काट सकेंगे।
8. निष्कर्ष
भले ही इसमें थोड़ा समय लगे और जब आपके क्लोन मर जाएं तो निराशा हो, यह तकनीक उपज बढ़ाने का बेहतरीन तरीका है और आपको बार-बार बीजों पर खर्च भी नहीं करना पड़ता। हम यह तकनीक अनुभवी उत्पादकों को सलाह देते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि नए उत्पादक मॉन्स्टर क्रॉपिंग में हाथ न आजमाएं। अगर आप नए हैं, तो सुनिश्चित करें कि बाकी पौधे भी साथ-साथ बढ़ रहे हों ताकि आप अपनी पूरी फसल जोखिम में न डालें। उचित देखभाल करें और जल्दी ही आप ढेर सारी कलियाँ काट पाएँगे।
यह लेख zuletzt अपडेट किया गया था 8 जून, 2021.
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